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केजरीवाल अगर "राम" हैं तो "कैकेयी" कौन ?

Posted On: 11 Apr, 2014 Others में

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दिल्ली मे 49 दिनो की सरकार के मुख्यमंत्री रहे अरविन्द केजरीवाल जी के हौसले दिन ब दिन बुलंद होते जा रहे है ! जब से वह गुजरात मे सैर सपाटा करके वापस लौटे हैं और शर्मा शर्मी उन्हे वाराणसी से मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने को मजबूर होना पड़ा है, वह एकदम बैकफुट पर आ गये है और अपने असितत्व को बचाये रखने के लिये कुछ ना कुछ ऐसा कहने की गलती कर रहे है जिससे उनकी पोल और जल्दी जल्दी खुल खुलकर जनता के सामने आ रही है- उनकी पार्टी के जो पुराने सहयोगी थे, उन लोगों को केजरीवाल जी के कारनामो की खबर काफी पहले ही लग गयी और एक एक करके उन सब ने इस “खास आदमी पार्टी” से किनारा करने मे ही अपनी भलाई समझी ! केजरीवाल जी भी हैरान हैं कि जिस स्पीड से उन्होने अपने खास आदमियों को लोकसभा के टिकट बांटे थे, उससे दुगुनी स्पीड से वे सारे टिकट उन्हे वापस मिल रहे हैं !

चोर की दाढ़ी मे तिनका वाली कहावत सभी पर लागू होती है सो भला केजरीवाल जी पर लागू क्यों ना होती – केजरीवाल भी इस बात को ताड गये थे कि यू ट्यूब के वीडियो मे जो उन्होने अपने आपको “शहीद भगत सिंह” की तर्ज़ पर शहीद बताकर उसकी तर्ज़ पर दिल्ली की सरकार कुर्बान करने की बात बताई थी, वह लोगों के गले नही उतर रही है और अगर पूरे देश मे बचे खुचे उम्मीदवारों की जमानत बचानी है तो कुछ और नया नाटक करना पड़ेगा ! केजरीवाल जी को तो इस काम मे जबरदस्त महारत हासिल है सो उन्होने अपनी चुनावी सभाओं मे एक नया शगूफा छोड़ दिया और अपनी तुलना आनन फानन मे भगवान श्री राम से करते हुये यह कहना शुरु कर दिया कि जैसे भगवान श्री राम को मजबूरी मे अयोध्या का राज छोड़कर वनवास जाना पड़ा था, ठीक उसी तरह उन्हे भी दिल्ली की राजगद्दी 49 दिनों के बाद ही छोड़ने के लिये मजबूर किया गया !केजरीवाल जी यहीं नही रुके-उन्होने आगे यह भी कह डाला कि भगवान का शुक्र है कि उस समय भाजपा नही थी, वर्ना वह भगवान राम को भी उसी तरह भगोड़ा घोषित कर देती जैसे कि मुझे भगोड़ा घोषित कर दिया है !

केजरीवाल जी ने जब यह नया शगूफा छोड़ा तो वह यह बताना भूल गये कि राम को तो कैकेयी की वजह से वनवास जाना पड़ा था लेकिन उन्हे दिल्ली की गद़दी छोड़ने के लिये किस “कैकेयी” ने उन्हे विवश किया था ? उन्होने तो खैर इस बात का खुलासा नही किया लेकिन जब वह कहते है कि -”भगवान का शुक्र है कि उस समय भाजपा नही थी, नही तो वह भगवान राम को भी भगोड़ा घोषित कर देती !” इस आरोप मे केजरीवाल जी ने अपनी सोची समझी रणनीति के तहत कांग्रेस का नाम नही लिया है और सिर्फ भाजपा को लपेटने की कोशिश की है ! अब”राम” बनने के लिये मजबूर केजरीवाल जी के लिये कांग्रेस मे “कैकेयी” की भूमिका सोनिया जी निभा रही है या फिर कोई और, इस सवाल का जबाब तो मिलने से रहा क्योंकि सवालों का केजरीवाल जी के दरबार मे “वन वे ट्रैफिक” है, जहां से सवाल सिर्फ आ सकते है-जा नही सकते !

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Maryland के द्वारा
October 17, 2016

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