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देशद्रोही जिन्दा हैं-देश बहुत शर्मिंदा है

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अभी हाल ही में देश की अलग अलग अदालतों ने जिस तरह से कुछ देशद्रोहियों को जमानत पर रिहा किया है, उसको देखकर देश की जनता के मन में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठने लगा है कि क्या देशद्रोह के मौजूदा कानून को और भी अधिक सख्त बनाए जाने की जरूरत है , ताकि कोई भी देशद्रोही इस तरीके से जमानत पर छूटने पाये क्योंकि जमानत से छूटने के बाद यह लोग देश और समाज के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन जाते हैं और अपने देशद्रोही राजनीतिक आकाओं के इशारे पर इनका नर पिशाची उत्पात 24 घंटे जारी रहता है.


जनता से भारी भरकम टैक्स के रूप में वसूली गयी रकम से सरकारी खर्च पर देशद्रोह की जो पाठशालाएं, देश के अलग अलग हिस्सों में चल रही हैं,उनके अध्यापक और छात्र दोनों ही देशद्रोह में लिप्त हैं.जरूरत इस बात कि है कि इन लोगों को तुरंत ही हिरासत में लेकर इनकी गतिविधियों पर रोक लगाई जाए. लेकिन अगर देशद्रोह का कानून ही इतना ढीला है कि हर किसी को तुरंत मृत्युदंड के बजाये जमानत मिल रही है तो फिर ऐसे कानून का भला किसे भय होगा ?


देशद्रोह के अपराधियों के लिए कानून को सिर्फ सख्त बनाए जाने की जरूरत है, बल्कि उस में एक निश्चित समय सीमा के अंदर मृत्युदंड का भी प्रावधान होना चाहिए . यह जरूरी है कि देशद्रोह के मामले अधिकतम महीने के अंदर निपटाए जाएँ और इन महीनों तक देशद्रोहियों को जमानत देने की बजाये , उन्हें जेल के अंदर ही रखकर , उनकी नियमित रूप से इतनी मरम्मत की जाए ,ताकि जेल के बाहर बैठे उनके देशद्रोही साथियों और समर्थकों के मन में खौफ पैदा हो और वे लोग भी देशद्रोह की हरकतों से बाज़ आएं.


हाल ही में जमानत पर रिहा किया गया एक देशद्रोही, विपक्षी राजनीतिक दलों में मौजूद अपने देशद्रोही आकाओं की शह पर देशद्रोह कि अन्य पाठशालाओं में जाकर अन्य छात्रों को भी देशद्रोह के लिए प्रेरित कर रहा है और वोट बैंक के लिए भूखी सरकारें पूरी तरह बेबस होकर , देशद्रोह क़ी इन वारदातों के आगे नतमस्तक हुयी जा रही हैं. सरकार इस बात का बहाना बना रही है कि-”पुलिस अगर देशद्रोहियों को पकड़ती है तो अदालत उन्हें जमानत पर रिहा कर देती हैं -तो हम क्या करें ?” सरकार अगर देशद्रोहियों के आगे अपने घुटने तक देगी तो देश की क्या हालत होगी,इसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है.


आज जरूरत इस बात की है कि देश के दुश्मनों के इशारे पर देशद्रोह की वारदातों में लिप्त सभी देशद्रोहियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाने के लिएअध्यादेशके जरिये एक सख्त कानून लाया जाए. जो भी देशद्रोही, इस तरह के अध्यादेश के विरोध में खड़ा दिखाई दे, उसे भी हिरासत में लेकर, उसकी इस कानून के तहत पहले मरम्मत और फिर मृत्युदंड क़ी उचित व्यवस्था की जाए. कुछ मीडिया हाउस देश क़ी आज़ादी के बाद से ही देश के दुश्मनों के इशारे पर चल रहे हैं और उनका एक मात्र उद्देश्य देशद्रोहियों को महिमामंडित करके ,उन्हें ख़बरों में बनाए रखना होता है.-इन मीडिया घरानों क़ी पहचान करके उनके मालिकों और सम्पादकों को भी देशद्रोह के कानून में लपेटना सरकार क़ी जिम्मेदारी है. जब तक देशद्रोहियों के खिलाफ सरकार इस तरह से ठोस कार्यवाही से परहेज़ करती रहेगी,भारत माता क़ी यही आवाज़ गूंजती रहेगी-” देशद्रोही जिन्दा हैं-देश बहुत शर्मिंदा है“.



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
April 1, 2016

श्री राजीव जी बहुत अच्छा प्रश्न उठाता लेख आज जरूरत इस बात की है कि देश के दुश्मनों के इशारे पर देशद्रोह की वारदातों में लिप्त सभी देशद्रोहियों को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाने के लिए “अध्यादेश” के जरिये एक सख्त कानून लाया जाए. जो भी देशद्रोही, इस तरह के अध्यादेश के विरोध में खड़ा दिखाई दे, उसे भी हिरासत में लेकर, उसकी इस कानून के तहत पहले मरम्मत और फिर मृत्युदंड क़ी उचित व्यवस्था की जाए.ऐसा सोचने पर ही विदेशी मानवाधिकार वादी और विदेशों से चंदा खाये क्रिमिनल के अधिकारों के लिए रैलियाँ निकालने लगेंगे

RAJEEV GUPTA के द्वारा
April 1, 2016

आदरणीय शोभा जी, ब्लॉग का संज्ञान लेकर उस पर अपनी सार्थक टिप्पणी करने के लिए आपका हार्दिक आभार .

RAJEEV GUPTA के द्वारा
April 1, 2016

आदरणीय सेंगर जी, ब्लॉग का संज्ञान लेकर उसको ब्लॉग बुलेटिन में शामिल करने के लिए आपका हार्दिक आभार .

sadguruji के द्वारा
April 1, 2016

“जनता से भारी भरकम टैक्स के रूप में वसूली गयी रकम से सरकारी खर्च पर देशद्रोह की जो पाठशालाएं, देश के अलग अलग हिस्सों में चल रही हैं,उनके अध्यापक और छात्र दोनों ही देशद्रोह में लिप्त हैं.जरूरत इस बात कि है कि इन लोगों को तुरंत ही हिरासत में लेकर इनकी गतिविधियों पर रोक लगाई जाए.” आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! जनता को झकझोरने वाले और सोचने पर मजबूर करने वाले ऐसे सार्थक और विचारणीय लेखन के लिए बहुत बहुत बधाई ! यहां पर आपकी रचना तक पहुंचना कठिन काम है, क्योंकि सर्च करने की सुविधा भी नहीं है ! कमेंट के जरिये आपके लेख नतक पहुंचा हूँ ! मंच पर बहुत अच्छा लिखा जा रहा है, किन्तु पाठकों तक उसकी सरलता से पहुँच नहीं है ! कुछ मंचों पर तो पेड लेखक और ब्लॉगरों के ब्लॉग इस तरह से अलग कर दिए गएँ हैं, मानों ब्लॉगरों के उत्कृष्ट लेखन से भयभीत हो गए हों ! सादर आभार !

RAJEEV GUPTA के द्वारा
April 1, 2016

आदरणीय सद्गुरु जी, ब्लॉग का संज्ञान लेकर उस पर अपनी शानदार और सार्थक टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन. दरअसल इस लेख से समूचा मीडिया काफी घबराया और बौखलाया हुआ है. नवभारत टाइम्स ने तो इस लेख को अपनी वेबसाइट से बैन कर दिया है क्योंकि एक दिन में ही इस लेख पर लाखों लोगों के “हिट्स” और सैंकड़ों कमेंट्स आ गए थे. लेकिन सच को दबाया नहीं जा सकता. इसीलिए उसी लेख को जागरण जंक्शन पर पाठकों की सुविधा के लिए एक बार फिर से प्रस्तुत किया जा रहा है.


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