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JNU :जनता के पैसे की बर्बादी आखिर कब तक ?

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पिछले काफी समय से देश की राजधानी मे स्थित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) गलत कारणों की वज़ह से खबरों मे बनी हुई है. ऐसा नही है कि इस तथाकथित यूनिवर्सिटी मे दुष्कर्म पहले नही होते होंगे-लेकिन फर्क यही हुआ है कि इनके ज्यादातर दुष्कर्म पिछली सरकारों द्वारा पोषित या प्रायोजित होते थे, इसलिये उन्हे आसानी के साथ नज़रअंदाज़ कर दिया जाता था. केन्द्र मे मोदी सरकार आने के बाद, अब जब इस तथाकथित यूनिवर्सिटी मे व्याप्त अवांछित गतिविधियों पर नकेल कसी जा रही है, तो इस तथाकथित यूनिवर्सिटी मे हड़कंप सा मच गया लगता है. इन अवांछित गतिविधियों का जैसे जैसे पर्दाफाश होता जा रहा है, उससे यह बात भी शीशे की तरह् साफ होती जा रही है कि इस यूनिवर्सिटी मे ज्यादातर लोग पढने के लिये नही, अपनी गुंडागर्दी की हवस पूरी करने के लिये आते हैं. इस यूनिवर्सिटी मे व्याप्त भयंकर गुंडागर्दी का जो ताज़ा मामला अभी अभी सामने आया है, उसमे कुछ ऐसे गुंडों ने यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर समेत कई अफ़सरों को लगभग 24 घंटे से ज्यादा समय के लिये बंधक बनाये रखा और वाईस चांसलर समेत बाकी सभी लोगों को बिना कुछ खाये पिये जमीन पर ही सोने को मजबूर होना पड़ा. इससे पहले भी दशहरा के मौके पर जब समूचे देश मे सर्जिकल स्ट्राइक पर खुशी जाहिर करते हुये लोग आतंकी देश पाकिस्तान और उसके पी एम नवाज़ शरीफ़ का पुतला जला रहे थे, इस यूनिवर्सिटी के तथाकथित छात्रों ने सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध करते हुये देश के पी एम मोदी का पुतला ही जला डाला.


एक के बाद एक घटित होती इन अपराधिक वारदातों के लगातार बढ़ने का एक कारण यह भी है कि सरकार,पुलिस और प्रशासन ने अभी तक इस यूनिवर्सिटी और उसमे कथित रूप से पढने आये छात्रों पर अभी तक सख्ती नही दिखाई है. जब काफी समय पहले इस यूनिवर्सिटी मे एक एक देशद्रोही आतंकवादी की माला पर फूल चढ़ाये गये थे और उसकी तस्वीर के सामने ही “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाते हुये देश के टुकड़े टुकड़े कर देने की बात यहाँ के मासूम छात्रों ने की थी, तब पुलिस ने दोषियों को पकड़कर उन पर कुछ ऐसी धाराएं लगाकर अपनी खानापूरी कर ली थी, जिसके चलते इन सभी अपराधियों को अदालत से बड़ी आसानी के साथ जमानत मिल गयी और जमानत पर छूटने के बाद वे सभी लोग दुगुने उत्साह के साथ अपराधिक घटनाओं मे एक बार फिर लिप्त हो गये. अगर पुलिस ने उसी समय गैर-जमानती धाराओं के तहत मामले दर्ज़ किये होते तो यहाँ के छात्रों की इतनी हिम्मत शायद नही होती कि वे सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध करते हुये देश के पी एम का पुतला जलाएं और यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर और अफ़सरों को बंधक बना सकें.


JNU मे होने वाली हर अपराधिक घटना के बाद सरकार के कुछ मंत्री कुछ सख्त बयानबाज़ी करके अपनी और अपनी सरकार की जिम्मेदारी  से मानो पल्ला झाड़ लेते हैं और बात आई गयी हो जाती है. सरकार को यह समझना चाहिये कि यह तथाकथित यूनिवर्सिटी जनता से वसूले गये करों के पैसे से चल रही है और जनता के पैसे की बर्बादी इस तरह की संस्थाओं पर करना कहाँ तक जायज़ है, जहाँ आने वाले लोगों का मकसद पढने की बजाये, गुंडागर्दी करना होता हो. सरकार अगर इन लोगों के खिलाफ कोई कारगर और सख्त कदम उठाने मे असमर्थ है तो कम से कम इस तथाकथित यूनिवर्सिटी को बंद करके जनता के अरबों-खरबो के धन की बर्बादी को तो तुरंत रोका जाये ताकि इस बचे हुये पैसे को जनहित के किसी और काम मे लगाया जा सके.


JNU के छात्र अपनी इस अपराधिक वारदात को सही ठहराते हुये यह दलील दे रहे हैं कि क्योंकि एक छात्र लापता हो गया है और हमे लगता है कि यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर उसे तलाशने के लिये पर्याप्त कदम नही उठा रहे हैं, इसलिए हम उन्हे बंधक बनाकर अमानवीय अपराध को अंज़ाम दे रहे हैं- इन तथाकथित छात्रो से कोई यह पूछे कि किसी गुमशुदा आदमी को तलाशने का काम वाईस चांसलर का नही, पुलिस का होता है और जो वाईस चांसलर खुद अपनी और अपने साथियों की हिफाज़त के लिये पुलिस की मदद नही मांग सकता, वह लापता छात्र के लिये पुलिस की मदद कैसे मांगेगा ?



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
October 22, 2016

श्री राजिव जी जेएनयू बहुत अच्छी संस्था हैं लेकिन बाम पंथियों का गढ़ है छात्र संघ राजनीति करते रहते है लेकिन पढने वाले अपने काम में लगे रहते हैं लेकिन टैक्स पेयर के पैसे पर पलने वाली संस्था से ऐसी उम्मीद नहीं थी

RAJEEV GUPTA के द्वारा
October 22, 2016

आदरणीय शोभा जी, ब्लॉग का संज्ञान लेकर उस पर अपनी सार्थक टिप्पणी करने के लिए आपका हार्दिक आभार . कोई भी संस्था अच्छी है या बुरी , यह मेरे हिसाब से इस बात से तय होता है क़ि वहां पर पढ़ने वाले छात्र और अध्यापक कैसे हैं. दिल्ली हाई कोर्ट ने इस साल के आरम्भ में ही जे इन यु के छात्रों और शिक्षकों को यह सख्त हिदायत दी थी क़ि वे लोग देशद्रोह छोड़कर देशप्रेम क़ि तरफ बढ़ें. लेकिन इन वामपंथियों पर अदालत क़ी बातों का भी कोई असर नहीं हुआ.


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