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मुलायम-अखिलेश ड्रामा-"जहाँ लूट- व़हाँ फूट"

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उत्तर प्रदेश मे जिसमे ड्रामे की पटकथा मुलायम् और अखिलेश ने मिलकर लिखी थी, उसके वास्तविक पर्दे पर आते आते, हालात ऐसे बन गये हैं, कि पटकथा का अंत इन दोनो के नियंत्रण से जाता दिख रहा है. इस नाटक की पटकथा लिखने की आखिर मुलायम या अखिलेश को जरूरत ही क्यों पड़ी ? उनकी सरकार अच्छी भली चल रही थी और अखिलेश अपनी साइकिल के जरिये प्रदेश के विकास के सपने भी लगभग ठीक से दिखा रहे थे-मुलायम को यह लगने लगा कि सिर्फ विकास के सपने से उत्तर प्रदेश जैसे राज्य की सत्ता दुबारा शायद ना मिले और उस विकास के सपने मे अपना पुराना, “जंगलराज और गुन्डाराज” का एक पुराना अध्याय भी जोड़ना जरूरी है. विकास और गुन्डाराज की इस रस्साकसी मे बात इस हद तक आगे बढ जायेगी, इसका अंदाज़ा शायद ना अखिलेश को था और ना मुलायम को.


दरअसल जब यह पटकथा लिखी गयी थी, उस समय पाक अधिकृत कश्मीर मे सर्जिकल स्ट्राइक नही हुई थी, इनकी पटकथा का मंचन चल रहा था और उसी दौरान “सर्जिकल स्ट्राइक” को मोदी सरकार ने इस तरह चौंकाने वाले अंदाज़ मे अंज़ाम दे दिया, कि पटकथा इनके हाथ से पूरी तरह फिसलकर ऐसी जगह जा पहुंची है, जहाँ इस पार्टी का हर नेता (ज्यादातर नेता तो परिवार के सदस्य ही हैं) पार्टी के प्रति अपने “अमूल्य” योगदान की कीमत जल्द से जल्द वसूल कर लेना चाहता है. सपा की सरकार दुबारा प्रदेश मे नही आयेगी, यह तो इन सभी नेताओं को अच्छी तरह मालूम है लेकिन इससे पहले कि सत्ता इनके हाथ से पूरी तरह चली जाये, उससे पहले परिवार के अंदर इस बात को लेकर जबरदस्त फूट पड गयी है कि अब इस पार्टी का असली करता धर्ता कौन है और आगे से किसकी चलेगी.


हालांकि जब अखिलेश विकास और सुशासन की बातें कर रहे थे, तब भी लोग उसे कोरी लफ्फ़ाज़ी ही मान रहे थे क्योंकि “विकास और सुशासन” जिस पार्टी के DNA मे ही ना हो, व़हाँ उस तरह की बात करने का कोई बहुत ज्यादा मतलब नही रह जाता है. समाजवादी परिवार(इस परिवार को पार्टी कहना अपने आप मे एक ज्यादती है) के सदस्यों का यह मानना है कि विकास और सुशासन से सिर्फ जनता का ही भला होता है, परिवार के सदस्यों का, बिल्कुल भी नही. ड्रामे की जो “ओरिजिनल स्क्रिप्ट” लिखी गयी होगी, उसके अनुसार अखिलेश को “विकास और सुशासन” का झुनझुना बजाना था और मुलायम एंड कम्पनी के अन्य किरदारों ने अपना पुराना “जंगलराज और गुन्डाराज” का राग पूरी मजबूती के साथ अलापना था-इन दोनो की खिचडी को इन सभी ने मिलकर खूब चाव से खाना था, लेकिन मोदी की एक सर्जिकल स्ट्राइक ने इनकी संभावित खिचडी के स्वाद को अभी से बिगाड़ दिया है और यह लोग इस बात से बेखबर कि राज्य की जनता इनके बारे मे क्या सोच रही है, एक दूसरे को नीचा दिखाने पर तुले हुये हैं.



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
October 27, 2016

जय श्री राम राजीव जी सेक्युलर डालो के डीएनए में केवल सत्ता है उसके लिए वे देश भी बेच सकते है ममता,नितीश,केजरीवाल,राहुल मुलायन इसी श्रेणी में आते है मुलायम को शिव पल ने भ्रमित कर दिया की विकास के बल पर सात में नहीं आएंगे इसलिए अपराधियो लो शामिल लिया और जवाहर बाघ भी गूंदो को चुनाव में तैयार करने के लिए था.शिव पल मुलायम बहुत ही अनैतिक नेता और मुलायम को पुत्रर मोह से ज्यादा कुर्सी प्यारी लेकिन अब नहीं मिलेगी,जनता होशियार है.सुन्दर लेख.

RAJEEV GUPTA के द्वारा
November 7, 2016

जय श्री राम रमेश जी, ब्लॉग का संज्ञान लेकर उसे पसंद करने एवं उस पर अपनी सार्थक टिप्पणी करने के लिए आपका आभार


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