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4000 के नोट बदलने पर तुरंत रोक लगाये सरकार

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8 नवंबर की रात को मोदी सरकार ने काले धन को समाप्त करने का जो ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला लिया है, उसके तहत कोई भी सड़क चलता व्यक्ति, जिसके पास बैंक खाता नही है, अपना कोई भी पहचान पत्र दिखाकर देश के किसी भी बैंक की किसी भी शाखा से जाकर 4000 रुपये तक के पुराने नोटों के बदले नये नोट ले सकता है. सरकार ने यह नियम इसलिये बनाया था ताकि जिन लोगों ने अभी तक बैंक मे खाते नही खुलवाये हैं, उन्हे इस योजना के चलते किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े, लेकिन बड़े बड़े राजनेताओं, व्यापारियों और उद्योगपतियों ने आम आदमी को राहत पहुंचाने वाली इस योजना का भी जमकर दुरुपयोग करना शुरु कर दिया है और इसी दुरुपयोग के चलते बैंकों के बाहर लम्बी लम्बी लाइने लगी हुई हैं.

दरअसल इस योजना का दुरुपयोग करते हुये भ्रष्ट नेता अपने कार्यकर्ताओं को रुपये बदलने का फॉर्म और पहचान पत्र की फोटोकॉपी के सैंकड़ों सेट देकर अलग अलग बैंकों की अलग अलग शाखाओं मे भेज रहे हैं. उदाहरण के लिये, अगर कोई भी व्यक्ति एक दिन मे दस बैंक शाखाओं से भी रुपये बदलने मे कामयाब हो जाता है, तो वह दिन भर मे 40000 रुपये आसानी से बदलवा सकता है. हर राजनीतिक पार्टी और नेता के पास कार्यकर्ताओं की जो फ़ौज़ है, अगर सभी लोग इसी काम पर लग जाएं तो 30 दिसंबर 2016 तक रोजाना 40000 के हिसाब से भी यह लोग करोड़ों रुपये बदलने मे कामयाब हो सकेंगे.

मजे की बात यह है कि जिन लोगों का बैंक मे खाता है, वे तो पूरे सप्ताह मे सिर्फ 20000 रुपये ही निकाल पायेंगे लेकिन जिनका खाता नही है, उनके लिये ऐसी कोई सीमा नही है और वे लोग जितनी मर्ज़ी बैंक शाखाओं मे जाकर 4000 रुपये के हिसाब से जितना चाहे पुराना धन नये धन से बदल सकते हैं. भ्रष्ट राजनेताओं की तर्ज़ पर भ्रष्ट सरकारी अधिकारी और व्यापारी भी इसी रास्ते को अपना रहे हैं. बहुत से व्यवसायिक प्रतिष्ठानो ने तो अपने सभी कर्मचारियों को सिर्फ इसी काम पर लगाया हुआ है और जो दिन भर मे सबसे अधिक रुपये बदलवाकर ला रहा है, उसे कुछ इनाम भी दिया जा रहा है.

इससे पहले कि जनता को दी गयी इस रियायत का और अधिक दुरुपयोग हो, इस योजना को तुरंत प्रभाव से बंद करना चाहिये ताकि बैंकों के आगे लगी हुई लम्बी लाइने खत्म हों और बैंक अपना समय असली खाताधारकों को दे सकें. वैसे भी जिन सड़क चलते लोगों ने (जिनके पास बैंक खाता नही है), अपने नोट बदलवाने थे, अब तक बदलवा ही लिये होंगे. मज़े की बात यह है कि बैंकों के पास यह चेक करने का भी कोई तरीका नही है कि जो लोग लाइन मे लगकर 4000 रुपये यह कहकर बदलवा रहे हैं कि उनके पास कोई बैंक खाता नही है, वे सच बोल रहे हैं या झूठ. ( आज सुबह कांग्रेस नेता राहुल गाँधी भी ४००० के नोट बदलवाने के लिए एक बैंक की लाइन में खड़े दिखे. क्या राहुल गाँधी का बैंक खता नहीं है ? अगर राहुल गाँधी बैंक की लाइन में खड़े होकर बैंक को चकमा देने की कोशिश कर सकते हैं तो कोई और क्यों नहीं कर सकता?)
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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
November 11, 2016

जय श्री राम राजीव जो शायद ऐसा नियम नहीं की जिनके बैंक अकाउंट नहीं वे ही ४००० रु के नोट बदल सकते अकाउंट में जमा कर सकते और ४००० रु कोइ भी बदल सकता है हां इसका गलत इस्तेमाल होगा लेकिन कुछ न कुछ सरकार करेगी नहीं तो ऐसे नोट सड़क नदियो में क्यों मिले?अच्छी जगह तीर चलाया

RAJEEV GUPTA के द्वारा
November 14, 2016

जय श्री राम रमेश जी, नियम बनाने की पीछे मंशा यही थी की जिन लोगों के बैंक कहते नहीं हैं, वे ४००० रुपये लेकर लाइन में लग जाएँ और जिनके पास बैंक खाते हैं, वे उन रुपयों को अपने खाते में जमा करके , ४००० क्यों, पूरे १०००० रुपये निकलवायें. पर हमारे देश में तो नियम दुरूपयोग करने के लिए ही बनाये जाते हैं. ब्लॉग का संज्ञान लेने के लिए आपका हार्दिक आभार

harirawat के द्वारा
November 20, 2016

राजीवगुप्ताजी नमस्ते ! आपका लेख पढ़ा, अच्छा लगा ! आज २० नवंबर तक काफी बदलाव आ चुका है ! अब एक्सचेंज की सीमा दो हजार है, अंगुली पर इंक का निशान ! जिन भ्रष्ट बेईमान नेता अभिनेताओं, व्यापारियों, उद्योगपतियों के व्यड रोमों में अरबों रुपए ५०० और १००० नोटों क्र रूप में दबे पड़े थे केवल मामूली सी रकम टैक्स बचाने के लिए अब मिटटी होने जा रही है, काश्मीर में पत्थर बाजी बंद होगयी है, स्कूल खुल गए है, पाकिस्तान द्वारा देश में नकली नोटों का धंदा बंद होगया है आम आदमी को चाँद रोजों की परेशानी है, फिर मेरा भारत महान बनने से कोइ नहीं रोक सकता ! साधुवाद !


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