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नोटबंदी पर सुप्रीमकोर्ट की दंगों की भविष्यवाणी

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नोट बंदी के खिलाफ डाली गयी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट खुद ही रद्द कर चुका है. सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले के मद्दे नज़र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह गुहार लगाई थी कि देश की अन्य अदालतों मे इस तरह् की याचिकाएं अभी भी डाली जा रही हैं और उन पर भी रोक लगाई जानी चाहिये. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की यह याचिका यह कहते हुये खारिज़ कर दी कि लोगों को नोट बंदी के चलते भारी परेशानी हो रही है और उन्हे अदालतों मे अपनी याचिका डालने के अधिकार से वंचित नही किया जा सकता है. यहाँ तक तो बात हज़म होने लायक लग रही थी. लेकिन अपनी इस दलील मे सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसी टिप्पणी भी जोड़ दी जिसके अनुसार बैंकों के बाहर लगी लम्बी लम्बी लाइनों की वजह से देश मे दंगे भी हो सकते हैं. बैंकों मे लगी लम्बी लाइनो की वजह से दंगे होने की भविष्यवाणी माननीय सुप्रीम कोर्ट ने किस आधार पर की, इसके बारे मे तो मीडिया मे कोई खबर नही आई है, लेकिन सोशल मीडिया मे सुप्रीम कोर्ट की इस अनावश्यक भविष्यवाणी को लेकर काफी चर्चा हो रही है. लोगों का यह मानना है कि सर्वोच्च अदालत का काम फैसला करना है और भविष्यवाणी करने का काम हमे भविष्यवक्ताओं और ज्योतिषियों के लिये ही छोड़ देना चाहिये.

यहाँ यह बात भी गौर करने लायक है कि हमारे देश मे आज से पहले कभी भी लम्बी लाइनो की वजह से दंगे नही हुये है. लोग जियो के सिम लेने के लिये, शराब खरीदने के लिये और राशन की लाइनो मे लगने के आदी हो चुके हैं और लम्बी लाइने कभी भी इस देश मे दंगों की वजह नही बनीं हैं. कश्मीर मे पिछले काफी समय से दंगों से भी बदतर हालात बने हुये थे. जब से नोटबंदी का फैसला आया है, कश्मीर के हालात एकदम सामान्य हो गये है. इसका सीधा सा मतलब यह है कि जितने भी दंगे आज तक देश मे हुये हैं, उनके लिये किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से ताल्लुक रखने वाली जनता कभी भी जिम्मेदार नही थी. दंगे हमेशा राजनीति से प्रेरित होते हैं और उन्हे प्रायोजित करने के लिये काला धन और जाली धन की बहुत अधिक जरूरत होती है. अगर इस कसौटी पर आज के हालातों को परखा जाये तो देश मे दंगा होने की कोई सूरत दूर दूर तक नज़र नही आती है. आज ना किसी राजनीतिक दल के पास काला धन है और ना ही जाली धन.

सोशल मीडिया पर तो देश की अदालतों मे लम्बित मामलों की जो लाइन लगी हुई है, उसके आकडे भी आ रहे हैं, जो बेहद चौंकाने वाले हैं. देश की निचली अदालतों मे 2,30,79,723 मामले लंबित पड़े हुये हैं, देश के विभिन्न हाइ कोर्ट मे 38,91,076 मामले लम्बित पड़े हुये हैं और खुद सुप्रीम कोर्ट मे 61,436 मामले ऐसे हैं, जिन पर अभी फैसला आना बाकी है. कुल मिलाकर देखा जाये तो 2,70,00,000 मामलों की विभिन्न अदालतों मे लाइन लगी हुई है और आज तक इतनी लम्बी लाइन लगने के बाबजूद भी इन लाइनो की वजह से देश मे कोई दंगा नही हुआ है.

अच्छा तो यह होता अगर सुप्रीम कोर्ट लम्बी लाइनो के लिये जिम्मेदार भ्रष्ट लोगों के खिलाफ सरकार को कडी कार्यवाही का आदेश देता क्योंकि यह बात धीरे धीरे बिल्कुल साफ होती जा रही है कि लाइनो मे लगे हुये लगभग 90 प्रतिशत लोग भ्रष्ट लोगों द्वारा भाड़े पर लिये हुये लोग हैं जो बाकी के 10 प्रतिशत लोगों के लिये परेशानी का कारण बन रहे हैं. पहले इन लोगों ने अपने काले धन को बदलवाने के लिये अपने कार्यकर्ताओं, दिहाड़ी के मजदूरों और अपने कर्मचारियों को 4000 बदलने की लाइन मे लगाकर लाइनो को लम्बा कर दिया और जब सरकार ने कुछ सख्ती दिखाई तो यह लोग आम जनता के जन धन खातों मे 250000 रुपये यह कहकर डलवा रहे हैं कि इन्हे 200000 रुपये निकालकर वह व्यक्ति एक निश्चित समय सीमा मे वापस कर दे. 50000 रुपये के लालच मे इन सभी लोगों के सामने यह बड़ी भारी चुनौती है कि उन्हे ATM  से या बैंक से निकालकर 200000 रुपये एक निश्चित समय सीमा मे वापस भी करने हैं. बैंकों मे लम्बी होती लाइनो का यही मुख्य कारण भी है.


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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
November 21, 2016

जय श्री राम राजीव जी सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी पर आच्चर्य लगता क्रिकेट सिनेमा के टिकेट लेने में भी तो लाइन लगानी पड़ती लेकिन कभी दंगे नहीं होते दंगे राजनेता करवाते कभी कभी फैसले चौकाने वाले होते जैसे लालू को बैल देना या भ्रष्ट नेताओ पर तुरंत फैसला नहीं देना.सबसे ज्यादा परेशानी न्याय मिलने में मिलती सुन्दर निष्कर्ष .

RAJEEV GUPTA के द्वारा
November 22, 2016

जय श्री राम रमेश जी, न्यायलय की टिप्पणी वाकई चुकाने वाली है. लाइनों से कब दंगे हुए हैं ? ब्लॉग का संज्ञान लेकर उस पर टिप्पणी करने के लिए आपका हार्दिक आभार.

Mohan Lal Sharma के द्वारा
November 26, 2016

बेहतरीम लेख . न्यायपालिका को अपने दायरे में रहकर काम करना चाहिए और राजनीतिक टिप्पणियों से बचना चाहिए.

Sangram Singh के द्वारा
November 26, 2016

राजीव जी, आँखे खोलने वाले लेख को पेश करने के लिए आपको बधाई

sadguruji के द्वारा
November 28, 2016

आदरणीय राजीव गुप्ता जी ! सार्थक, विचारणीय और पठनीय लेख की प्रस्तुति के लिए सादर अभिनन्दन और हार्दिक बधाई ! दूसरी बार पढ़ने का मौका मिला ! ये मोदी के प्रति आशा भरी उम्मीद और असीम निष्ठा का ही नतीजा है कि जनता उन्हें पूरा सहयोग दे रही है ! दंगे की बात भय मात्र साबित हुआ ! सामयिक और सराहनीय चर्चा के लिए सादर आभार !

RAJEEV GUPTA के द्वारा
November 30, 2016

ब्लॉग का संज्ञान लेकर उस पर टिप्पणी करने के लिए आपका हार्दिक आभार.

RAJEEV GUPTA के द्वारा
November 30, 2016

संग्राम सिंह जी, ब्लॉग का संज्ञान लेकर उसे पसंद करने के लिए आपका आभार,

RAJEEV GUPTA के द्वारा
November 30, 2016

आदरणीय राजेन्द्र ऋषि जी, ब्लॉग का संज्ञान लेकर उसे सार्थकता प्रदान करने एवं उस पर अपनी सार्थक टिप्पणी करने के लिए आपका हार्दिक आभार एवं अभिनन्दन


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