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क्या NDTV की दुकान अब बंद होने वाली है ?

Posted On: 6 Jun, 2017 Junction Forum में

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विवादों में रहने वाले न्यूज़ चैनल NDTV के मालिक और चेयरपर्सन प्रणय रॉय और राधिका रॉय के दिल्ली और देहरादून स्थित ठिकानों पर सी बी आई ने एक बैंक धोखाधड़ी के मामले में छापेमारी की है. NDTV द्वारा कानून के साथ खिलवाड़ करने का यह पहला मामला नहीं है. FEMA कानून के उल्लंघन के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय की २०१५ से ही इस चैनल की कारगुजारियों पर कड़ी नज़र थी. २०१६ में SEBI ने भी टेकओवर नियमों के उल्लंघन के सिलसिले में चैनल को एक नोटिस जारी किया था.


बैंक धोखाधड़ी की जांच सी बी आई ने शुरू कर दी है और यह धोखाधड़ी कितनी बड़ी है, इसका पूरा खुलासा भी जांच पूरी होने के बाद ही पता चलेगा. लेकिन धोखाधड़ी की जांच के नतीजे सिर्फ यह तय कर सकते हैं कि कुल मिलाकर कितनी बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी इस चैनल के मालिकों ने अंजाम दी हैं, यह बात तो पहले ही तय हो चुकी है कि वित्तीय गड़बड़ियां हुईं हैं. किसी और देश में अगर इस तरह का वाकया हुआ होता तो अब तक इस चैनल का लाइसेंस वहां की सरकार ने रद्द कर दिया होता. लेकिन हमारे देश में न्याय की प्रक्रिया इतनी सुस्त, ढीली और लचीली है कि सभी अपराधियों को इससे बच निकलने का इतना ज्यादा यकीन रहता है, कि वे रात के दो बजे भी सुप्रीम कोर्ट के बाहर जाकर खड़े हो जाते हैं. सलमान खान और जयललिता के मामले में किस तरह के अदालती फैसले आये थे, उसे देश क़ी जनता देख ही चुकी है.


अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि पिछली सरकारों के समय में इस चैनल पर कार्यवाही क्यों नहीं हुईं और किसी आर्थिक घोटाले और गड़बड़ी के चलते यह चैनल अब तक कैसे चल रहा है ? यह सभी जानते हैं कि इस चैनल पर किस तरह की ख़बरें परोसी जाती रही हैं. संघ, भाजपा और राष्ट्रवादी विचारधारा का जमकर विरोध करना ही इस चैनल का मुख्य उद्देश्य रहा है. इस देश में हर किसी को मानों इस बात का लाइसेंस मिला हुआ था कि अगर वह संघ,भाजपा,मोदी और राष्ट्रवाद का जमकर विरोध करेगा तो उसके सात क्या सौ खून भी माफ़ कर दिए जाएंगे और अगर उसके खिलाफ कानून कोई कार्यवाही करेगा तो उसके समर्थक उसे “बदले क़ी कार्यवाही” या फिर “मीडिया की आज़ादी” पर हमला बताकर उसके द्वारा अंजाम दिए गए वित्तीय घोटाले की गंभीरता को कम करने का भरसक प्रयास करेंगे.


पत्रकारिता क़ी आड़ में चल रहे NDTV जैसे गोरखधंधों पर अब मोदी सरकार ने नकेल कसनी शुरू क़ी है तो “अभिव्यक्ति क़ी आज़ादी” और “मीडिया क़ी आज़ादी” का शोर मचाने वालों ने अपना झुनझुना बजाना शुरू कर दिया है. इन लोगों क़ी माने तो “पत्रकारिता और मीडिया क़ी आज़ादी”: क़ी आड़ में सभी तरह क़ी गड़बड़ियां और घोटाले भी जायज हैं. लेकिन इन लोगों का दुर्भाग्य है कि समय इनके साथ नहीं है. जैसी मस्ती और आज़ादी इन्होने पिछली सरकारों के दौर में भोगी थी, वह इनसे छिन चुकी है, इनके चैनल का लाइसेंस कब छिनेगा और कब यह “ख़बरों की दुकान” यकायक बंद हो जाएगी, यह आने वाला समय ही बताएगा.

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 7, 2017

श्री राजिव जी मीडिया का यही हाल है देखते-देखते धनवान हो रहे हैं प्रणव राय तो कमाई के मामले में भी और बायस खबरे देने में भी मशहूर हैं नाम अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का दम भरते हैं जानकारी से पूर्ण उत्तम लेख

sadguruji के द्वारा
June 7, 2017

आदरणीय राजिव गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! बहुत अच्छा लेख ! मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये ! आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि ‘पत्रकारिता और मीडिया क़ी आज़ादी’ क़ी आड़ में कई तरह क़ी गड़बड़ियां और घोटाले अब तक हुए हैं ! प्रणव राय देश के कानून से ऊपर नहीं हैं ! कानून को अपबना कार्य करना चाहिए ! न्यूज चैनलों पर ऐसी चर्चा है कि दूरदर्शन पर जब वो थे, तब भी उनपर आरोप लगे थे ! अच्छी प्रस्तुति हेतु सादर आभार !

RAJEEV GUPTA के द्वारा
June 7, 2017

आदरणीय राजेंद्र ऋषि जी, ब्लॉग का संज्ञान लेकर उसे पसंद करने एवं उस पर अपनी सार्थक टिप्पणी करने के लिए आपका हार्दिक आभार. यह लेख पढ़कर नव भारत टाइम्स के संपादक बहुत ज्यादा परेशान हो गए और उन्होंने कहा कि जब तक इस लेख की भाषा शैली नहीं बदली जाएगी, वे इसे नहीं छाप सकेंगे. जिस तरह की पत्रकारिता NDTV कर रहा है, उसी तरह की पत्रकारिता में खुद नवभारत टाइम्स वाले भी कर रहे हैं, लिहाज़ा इस लेख को नव भारत टाइम्स में न छापने की उनकी मजबूरी को भी समझा जा सकता है.

RAJEEV GUPTA के द्वारा
June 7, 2017

आदरणीय शोभा जी, इसमें कोई शक नहीं है कि पत्रकारिता की आड़ में प्रणय राय ने पिछली सरकारों के सहयोग से बहुत मोटा माल बनाया है. अब जब इन पर कार्यवाही हो रही है तो मीडिया में बैठे उन सभी लोगों को बहुत तकलीफ हो रही है जो खुद इस तरह की कारगुजारियों में व्यस्त हैं. क्योंकि अगला नंबर अब उन्ही का आने वाला है. ब्लॉग का संज्ञान लेकर उस पर अपनी सार्थक टिप्पणी के लिए आपका आभार.

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 7, 2017

राजीव गुप्ता जी,बहुत सुन्दर चित्रण , अब आ रहा है मजा जब शुक्राचार्य के गण ही आपस मैं एक दूसरे की खाल खींचेंगे | एक बेचारे गरीब चैनल पर शनि द्रष्टि पड रही है । अन्य महान शुक्राचार्य के गण दुध के धुले लग रहे हैं। अब शुक्राचार्य के गणों की आपस मैं होली होगी । ओम शांति शांति 

RAJEEV GUPTA के द्वारा
June 8, 2017

हरीश जी, शास्त्रों के अनुसार शनि की दृष्टि उसी व्यक्ति पर पड़ती है, जिसने घोर पाप किये हों. इस चैनल के दुष्कर्मों का घड़ा अब भर चुका है, अब इसे कोई नहीं बचा सकता. आपने ब्लॉग का संज्ञान लेकर उस पर अपनी शानदार टिप्पणी की, उसके लिए आपका हार्दिक आभार


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